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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नागपुर में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया

सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नागपुर में आयोजित भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए भारत की भाषाई विविधता को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति बताया। महर्षि व्यास सभागृह में आयोजित इस सत्र का विषय था — “भारतीय भाषाएँ और विकसित भारत – 2047”। उपराष्ट्रपति ने नागपुर के ऐतिहासिक महत्व का […]

सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नागपुर में आयोजित भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए भारत की भाषाई विविधता को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति बताया। महर्षि व्यास सभागृह में आयोजित इस सत्र का विषय था — “भारतीय भाषाएँ और विकसित भारत – 2047”।

उपराष्ट्रपति ने नागपुर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मभूमि है, जिसकी स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में की थी। उन्होंने कहा कि एक छोटे प्रयास से एक विशाल राष्ट्रसेवी आंदोलन तक का सफर “राष्ट्र प्रथम” की भावना को दर्शाता है।

उन्होंने भारतीय युवा संसद राष्ट्रीय न्यास की दो दशकों से अधिक की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच ने देशभर के युवाओं को जोड़कर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत किया है।

भाषाई विषय पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में अभिव्यक्ति व्यक्ति को “क्षेत्रीय” नहीं बल्कि “मौलिक” बनाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर भाषा अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है और सभी मिलकर भारत की एकता को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने संविधान को विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी संभव है जब देश अपनी जड़ों से नवाचार करे और अपनी भाषाओं व लिपियों में सोचने की क्षमता विकसित करे।

संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की भूमिका की प्रशंसा की और कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान परंपरा का आधार है तथा अनेक भाषाओं को जोड़ती है।

लोकतंत्र में संवाद की अहमियत पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मतभेद रचनात्मक चर्चा और समाधान का मार्ग प्रशस्त करने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा संसद जैसे मंच युवाओं को सम्मानजनक बहस, विविध दृष्टिकोणों को समझने और सहमति बनाने की सीख देते हैं।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी को “अमृत पीढ़ी” बताया और कहा कि यही पीढ़ी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा संसद इस लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इससे पहले उपराष्ट्रपति ने डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन में डॉ. हेडगेवार की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में जिष्णु देव वर्मा, चंद्रशेखर बावनकुले, डॉ. कृष्ण गोपाल, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और आशुतोष जोशी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों और देशभर से आए युवाओं ने भाग लिया।

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