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Thursday, 13 August 2026
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पश्चिमी देशों और बाजार द्वारा थोपी गई संस्कृति को पनपने नहीं दिया जाएगा: पंडित अधीर कौशिक

हरिद्वार- श्रीब्राह्मण सभा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने वेलेंटाईन डे मनाने का विरोध करते हुए कहा कि कहा कि हम प्रेम के खिलाफ नहीं हैं। बल्कि हम वैलेंटाइन डे जैसी पाश्चात्य संस्कृति की आड़ में प्यार के नाम पर किए जाने वाले अश्लील प्रदर्शन के खिलाफ हैं। पं.अधीर कौशिक ने सवाल खड़ा करते हुए […]

हरिद्वार- श्रीब्राह्मण सभा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने वेलेंटाईन डे मनाने का विरोध करते हुए कहा कि कहा कि हम प्रेम के खिलाफ नहीं हैं। बल्कि हम वैलेंटाइन डे जैसी पाश्चात्य संस्कृति की आड़ में प्यार के नाम पर किए जाने वाले अश्लील प्रदर्शन के खिलाफ हैं। पं.अधीर कौशिक ने सवाल खड़ा करते हुए कहा- क्या आपने वे कार्ड देखे हैं जो वैलेंटाइन डे पर दिए जाते हैं? उनमें प्रेमी जोड़े किस करते हुए दिखते हैं। क्या यह हमारी संस्कृति हैं? क्या हम इसी तरह प्यार का जश्न मनाते हैं? अधीर कौशिक ने आगे कहा- हम पश्चिमी सभ्यता की उन बातों के खिलाफ नहीं है जो हमारी मददगार हैं. क्रिकेट हमारा खेल है जिसे अंग्रेज लाए। लेकिन हमें उसके साथ कोई दिक्कत नहीं हैं। लेकिन वैलेंटाइन डे का प्यार से कुछ भी लेना देना नहीं है, बल्कि यह भावनाओं का अश्लील प्रदर्शन करता है। श्री ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष पं.अधीर कौशिक का कहना है कि आज के युवाओं का प्रेम का तरीका पूरी तरह पाश्चात्य संस्कृति से ओत-प्रोत है। प्रेम किसी एक खास दिन करने का नाम नहीं है, बल्कि यह तो हर दिन, हर पल किया जा सकता है। पश्चिमी देशों और बाजार द्वारा थोपी गई संस्कृति को हम कतई पनपने नहीं देंगे। वेलेंटाइन डे के नाम पर समाज में अश्लीलता, अभद्रता, भौंडापन और नंगापन परोसा जा रहा है। हमारे देश में हर चीज के लिए त्योहारों की परंपरा है। इनमें प्रेम प्रदर्शन के त्योहार भी शामिल हैं, लोग उन्हें क्यों नहीं मनाते? उन्होंने कहा कि फिल्मों और टीवी के सहारे चलने वाली हमारी युवा पीढ़ी बाजारवाद की राजनीति से बेखबर पाश्चात्य संस्कृति में बही जा रही है। उसे रोकने का कर्तव्य भी हम सबका है। सही रास्ता दिखाने के लिए भले ही सख्त कदम उठाना पड़े। लेकिन हम संस्कृति के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। बसंत पंचमी, हरतालिका तीज जैसे त्योहारों के जरिये भी प्रेम का इजहार किया जा सकता है। फिर हम अपने देश में बाहरी संस्कृति को क्यों जगह बनाने दें? संत वेलेंटाइन ने भी प्रेम के प्रदर्शन में अश्लीलता का संदेश नहीं दिया है। लेकिन उनके द्वारा बनाए गए प्रेम के दिन को भारतीय युवाओं ने अपनी मनमर्जी से विकृत कर लिया है। इसे अभी न रोका गया तो आने वाली पीढ़ीयाँ हमारी संस्कृति से बेखबर रहेंगी और पाश्चात्य सभ्यता की पैरवी करने लगेंगी।
इस अवसर पर भगत सिंह चैक स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर फूलमालाएं अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए युवा वर्ग से वेलेंटाईन डे के बजाए शहीदों को नमन करने की अपील भी की गयी। सामाजिक कार्यकर्ता डा.विशाल गर्ग ने कहा कि आज ही दिन अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखेदव को अंग्रेजी सरकार ने फांसी की सजा सुनाई थी। आज का दिन भारत के इतिहास में देश की खातिर बलिदान देने वालों वीर शहीदों को याद करने का दिन है। इसलिए युवा वर्ग को पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर वेलेंटाईन डे मनाने के बजाए वीर शहीदों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए देश सेवा का संकल्प लेना चाहिए।

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