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भारत में गुरुओं के मेले में मक्खियों की तरह चेले शक्कर, भीड़मभाड़, अव्यवस्था

अजय दीक्षितगुरु पूर्णिमा के दिन पूरे देश में गुरुओं के मेले लगे , भयानक अव्यवस्था, भीड़मभाड़, सड़कों पर दर्जनों किलोमीटर के जाम, दुर्घटनाएं लेकिन परेशानियों पर आस्था भारी,यही है आज की भारत की तस्वीर। हालांकि धर्म की आलोचना हमेशा मुश्किल है और मुश्किल में डालती है विशेषकर आज की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में ओर भी कठिन […]

अजय दीक्षित
गुरु पूर्णिमा के दिन पूरे देश में गुरुओं के मेले लगे , भयानक अव्यवस्था, भीड़मभाड़, सड़कों पर दर्जनों किलोमीटर के जाम, दुर्घटनाएं लेकिन परेशानियों पर आस्था भारी,यही है आज की भारत की तस्वीर। हालांकि धर्म की आलोचना हमेशा मुश्किल है और मुश्किल में डालती है विशेषकर आज की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में ओर भी कठिन है। क्योंकि आबादी का दबाव इस कदर है कि कोई भी व्यवस्था असफल हो सकती है। सीहोर के पास कुबेश्वर में 5 लाख, धूनी वाले बाबा के आश्रम में तीन लाख,मुरैना के नजदीक करह आश्रम में पांच लाख, और दर्जनों किलोमीटर सड़क पर जाम , हजारों राहगीर वाहन,मरीज,परेशान फिर भी आस्था भारी।
धर्म और गुरुओं का चोली दामन का साथ है। सनातन धर्म में गुरुओं और ऋषियों की महान परम्परा रही है।भगवान श्री राम के गुरु ऋषि विश्वामित्र जी, कृपाचार्य,गुरु द्रोण, ऋषि परशुराम आदि का उल्लेख सनातन धर्म में त्रेता, द्वापर युग में है । भगवान श्री कृष्ण सांदीपनी आश्रम में गुरु के पास शिक्षा ग्रहण करने गए थे ऐसा शास्त्र बचन है। लेकिन विगत 25 वर्षों से जो गुरुओं की महिमा मंडित हुई है वह सनातन धर्म की परंपरा के अनुरूप नहीं कही जा सकती है। बागेश्वर धाम छतरपुर विगत रात एक दीवार गिरने से एक श्रद्धालु की मौत हो गई और 11 घायल हैं।अभी हाल ही में सीहोर पंडित प्रदीप मिश्रा के आश्रम में भगदड़ मच गई। आखिर यह सब किस लिए हो रहा है। गुरुओं के आश्रम में व्यक्ति दो कारणों से जाता था एक शिक्षा ग्रहण करने या तनाव से मुक्ति के लिए मन  शांति हेतु।मगर इस भागम भाग के दौर में किसी को क्या हासिल होगा यह समझ से परे है।
कुंभ के मेले में खूब करोड़ों चेले उनके गुरु एकत्रित हुए। मुझे नहीं लगता कि पूरे कुंभ से सनातन माइथॉलजी में या सामाजिक संस्थाओं , रीति रिवाज के लिए कोई सार्थक संदेश निकला हो। अलबत्ता उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी पीठ जरूर थपथपा ली कि संसार के सबसे बड़े आयोजन को संपादित किया। लेकिन भीड़ तो भीड़ है इतने इंतजाम के बाद भी भगदड़ तो मची थी और कई चालीस लोग मौत के शिकार हुए।यह भीड़ का आध्यात्म नहीं है बल्कि भेंड़चाल शब्द अधिक सटीक है लेकिन गुरुओं को इसमें अपनी सफलता प्रतीत होती है।आजकल गुरुओं के साथ चेले भी शक्कर हो गए हैं।धार्मिक मंदिर,मठ, आश्रम दौलत से भरे पड़े हैं हालांकि कुछ आश्रम सकारत्मक कार्य भी कर रहे हैं परन्तु अधिकांश गुरुओं के आश्रम अपने धनाढ्य चेले के लिए ही है। गुरुओं के दमकते आभा मंडल , ऐश्वर्या देखते ही बनती है। सुपर पावर गाडियां,हवा में उड़ते वायुयान, हेलिकाप्टर,,राजमहल,धन दौलत गरीब , पीड़ित, शोषित, समाज को जैसे चिड़ा रही हो।किसी ने सही कहा है कि भगवान श्री राम बनवास के दौरान परेशान रहे , नंगे पैर चले, भूखे रहे, सबरी के बेर खाए,बन बन भटके और अब उनकी रामकथा सुनाने कथावाचक हेलीकॉप्टर से आ रहे हैं।

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