मथुरा
वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में गर्भगृह की नई चांदी की देहरी को लेकर उठा विवाद अब गहराता जा रहा है। कानूनी नोटिस और परंपराओं के सवालों के बीच मंदिर की हाई पावर्ड कमेटी ने वसंत पंचमी पर प्रस्तावित देहरी पूजन कार्यक्रम से अपने कदम पीछे खींच लिए। शुक्रवार सुबह तय समय पर मंदिर में कोई पूजन नहीं हुआ, जिससे मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
गौरतलब है कि एक श्रद्धालु द्वारा मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार के लिए करीब 10.5 किलोग्राम चांदी की देहरी भेंट की गई थी। 19 जनवरी को हुई हाई पावर्ड कमेटी की 10वीं बैठक में समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वसंत पंचमी के अवसर पर सुबह 8:30 बजे समिति के पदाधिकारी और सदस्य इस देहरी का विधि-विधान से पूजन करेंगे।
इस घोषणा के बाद मंदिर के पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी के अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने समिति के अध्यक्ष और सचिव को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया कि देहरी पूजन हरिदासी संप्रदाय की विशिष्ट पारंपरिक और आध्यात्मिक पूजा पद्धति है, जिसे केवल उसी संप्रदाय के सदस्य या दीक्षित भक्त ही संपन्न कर सकते हैं। गैर-संप्रदाय के लोगों द्वारा पूजन करना मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के विरुद्ध बताया गया। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि जब आम श्रद्धालुओं के लिए पूजन पर रोक है, तो समिति के सदस्य स्वयं यह विशेषाधिकार कैसे ले सकते हैं।
नोटिस का असर शुक्रवार को साफ दिखाई दिया। तय समय पर कोई पूजन नहीं हुआ। बढ़ते विवाद के बीच समिति सदस्य एवं मंदिर सेवायत दिनेश गोस्वामी ने दावा किया कि समिति की ओर से ऐसा कोई कार्यक्रम तय ही नहीं था। हालांकि, मंदिर गलियारों में चर्चा है कि कानूनी पचड़े और सेवायतों के विरोध के चलते समिति ने अंतिम समय में कदम पीछे खींच लिए।
इसी बीच देहरी स्थापना के दौरान एक रोचक तथ्य भी सामने आया। जब गर्भगृह की पुरानी चौखट हटाई गई तो वहां एक के ऊपर एक दबी हुई पांच पुरानी देहरियां मिलीं, जिनमें चार चांदी की और एक गिलट की बताई जा रही हैं। इन ऐतिहासिक देहरियों को सुरक्षित रखने के लिए मंदिर प्रबंधन ने उन्हें बैंक लॉकर में जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

