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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दुबई में फंसे भारतीय प्रवासी श्रमिकों के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मीडिया में प्रकाशित उस खबर का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के कम से कम 14 प्रवासी मजदूरों के दुबई में फंसे होने का दावा किया गया है। खबरों के अनुसार, एक ट्रांसमिशन लाइन निर्माण कंपनी ने इन मजदूरों को काम […]

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मीडिया में प्रकाशित उस खबर का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के कम से कम 14 प्रवासी मजदूरों के दुबई में फंसे होने का दावा किया गया है। खबरों के अनुसार, एक ट्रांसमिशन लाइन निर्माण कंपनी ने इन मजदूरों को काम पर रखा था और अब उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं, जिससे वे स्वदेश लौटने में असमर्थ हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि मजदूरों को लंबे समय से वेतन नहीं दिया जा रहा है। पीड़ित मजदूरों ने झारखंड सरकार से सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराने की अपील की है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावे सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। इसे गंभीरता से लेते हुए आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव और झारखंड प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष (एमडब्ल्यूसीआर) के प्रमुख को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

3 फरवरी 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दुबई में फंसे मजदूरों में से एक ने फोन पर बताया कि कंपनी ने भारत से दुबई आने के लिए खरीदे गए हवाई टिकट के खर्च की भरपाई के नाम पर उनके वेतन का बड़ा हिस्सा काट लिया। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी मजदूरों से रहने का खर्च वसूल रही है, जिससे उनके पास भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीदने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं बचा है।

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