SANDEEP CHAUHAN
हरिद्वार
गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार में छात्रों की 21 सूत्रीय मांगों और कुलपति महोदया के इस्तीफे की मांग को लेकर आशु मलिक का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा। लगातार पांच दिनों से अनशन पर बैठे आशु मलिक की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने की सूचना के बाद चिकित्सकों की टीम अनशन स्थल पर पहुंची और उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। उनकी हालत को लेकर चिंता बढ़ने के बीच अब विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
आशु मलिक, प्रदेश अध्यक्ष बजरंग वाहिनी दल उत्तराखंड एवं विश्वविद्यालय के छात्र, शैक्षणिक, प्रशासनिक और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में स्थायी स्टूडेंट-एडमिनिस्ट्रेशन कमेटी का गठन, डिबेट रूम की स्थापना, विश्वविद्यालय कैंटीन को दोबारा शुरू करना, विभागों के बार-बार स्थानांतरण पर रोक और छात्र प्रतिनिधित्व की बहाली शामिल हैं।
इसके अलावा छात्रावास एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार, पुस्तकालय में आवश्यक पुस्तकों की उपलब्धता, जिम और खेल सुविधाओं का विकास तथा योग विज्ञान विभाग के स्थानांतरण की समीक्षा की मांग भी उठाई गई है। कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून की समस्याओं का समाधान, प्रशासनिक पारदर्शिता और कुलपति की नियुक्ति में यूजीसी रेगुलेशन-2023 के अनुपालन की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।
आशु मलिक ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक छात्रों की जायज मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कुलाधिपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी 21 मांगों पर तत्काल सकारात्मक एवं लिखित कार्यवाही करने की मांग की है। साथ ही कुलपति महोदया के इस्तीफे की मांग पर भी निर्णय लेने की अपील की है।
पांच दिनों से जारी आमरण अनशन और अनशनकारी की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति ने मामले को गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और आंदोलन को समाप्त कराने के लिए कोई ठोस पहल होती है या नहीं।