हरिद्वार – बड़े बड़े दावे करने वाले पर्यावरण प्रेमी सिर्फ नारो और विचारो तक ही सीमित है, तथा सरकारी तन्त्र भी सिर्फ दिखावा करता है असलीयत में प्रदूषण की रोक थाम के लिये कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी सीमा विवाद में उलझे है, तो कही विभाग के अन्तर्गत मामलो की सुनवाई ना करने का अधिकार मिलने की बजह से बेबस नजर आते है, प्राईवेट संस्थाओ को तो एक बार फिर भी नोटिस भेजने का सिलसिला जारी रखा जाता है, लेकिन बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैला रही सरकारी संस्थाओ को तो कुछ नही कह सकते, हरिद्वार जनपद में ही नही वरन पुरे भारत में संचालित अधिकतर सरकारी अस्पताल बायो वेस्ट मैनेजमेन्ट के मामले में बहुत पिछडे हुये है। हरिद्वार जनपद के भगवानपुर ब्लांक की सी0एच0सी0 जो एफ0 आर0 यू0 यूनिट है, उसके मुख्य भवन के पीछे भारी मात्रा में बायो वेस्ट अधजला पड़ा है। तो वही पास में बनी दोनो पिटो में भयंकर रूप से बायो वेस्ट भरा पड़ा है। जब के इसके ट्रिटमेन्ट के लिये C.H.C प्रशासन ने अधिकारीक रूप से बायो वेस्ट का ट्रिटमेन्ट करने वाली कम्पनी से एग्रीमेन्ट किया हुआ है। और दावा ये है नियमित रूप से ट्रिटमेन्ट करने वाली कम्पनी का वाहन बायो वेस्ट लेकर जाता है, पता नही किस कारण वश भारी मात्रा मे बायो वेस्ट फिर भी अस्पताल के मुख्य भवन के पीछे पड़ा नजर आता है। इसके अलावा झबरेड़ा P.H.C नारसन C.H.C में भी पिट अधजले बायो वेस्ट से नजर आयेगी और प्रबन्धन के नाम पर बायो वेस्ट को खुले में ही जलाया जाता है। मंगलौर C.H.C की हालत देखकर तो ऐसा लगता है कि अस्पताल को खुद ही इलाज की आवश्यकता है। दो दो जगह बायो वेस्ट खुले में जलाने के साथ ही प्रागण में ही बनी दोनो पिटो में इतना बायो वेस्ट है, जिसे देखकर अच्छा खासा आदमी भी बेहोश हो सकता है, एक पिट में बोतले, इन्जैक्सन आदि पड़े है तो दूसरी पिट में खून का अम्बार है, ऊपर से देखने मे प्रतीत होता है, कि गर्भपात से निकले बच्चो के टूकड़े पडे़ है। हो सकता है ये किसी और तरह के मांस के टूकडे या अन्य अवशेष हो । लेकिन जो भी हो उनमें इतने कीड़े चल रहे है, सिर्फ पूरी पिट में कीड़ा ही कीड़ा नजर आता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है, कि बायो वेस्ट मनैजमेन्ट खर्च के लिये तो पैसा मिलने का सवाल ही नही उठता, तीन माह से तो स्टाफ की सैलरी नही मिली है। दुनिया में नामचीन शहर रूड़की के मुख्य अस्पताल में तो वहा के वेस्ट मनैजमेन्ट करने वाले कर्मचारी इतने बेखोफ और पर्यावरण प्रेमी है। कि अस्पताल के मुख्य द्वार के पास ही दिन के 1 बजें एक कोने में साधारण कूड़ा जिसमें पेड़ो की पत्ती,कागज के टूकडे़,पोलोथिन जैसा कबाड जलाते है, तो दूसरे कोने में बायो वेस्ट भी जला देते है, जबकि यहा भी अस्पताल प्रशासन ने अधिकारीक रूप से बायो वेस्ट का ट्रिटमेन्ट करने वाली कम्पनी से एग्रीमेन्ट किया हुआ है। और रोजाना बायो वेस्ट उठाने वाली गाडी आने का दावा किया जाता है। मामले में जब पर्यावरण एवं प्रदूषण विभाग से बात की गई तो उन्होने भी दबे स्वरो में सरकारी अस्पतालो के खिलाफ ठोस कार्यावाही ना कर पाने का मलाल दिखा। यहा पर एक पुरानी कहावत चरिर्ताथ हो जाती है। ’’ अंधी पीस रही और कुत्ते खा रहे है ’’
हरिद्वार – बड़े बड़े दावे करने वाले पर्यावरण प्रेमी सिर्फ नारो और विचारो तक ही सीमित है, तथा सरकारी तन्त्र भी सिर्फ दिखावा करता है असलीयत में प्रदूषण की रोक थाम के लिये कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी सीमा विवाद में उलझे है, तो कही विभाग के अन्तर्गत मामलो की सुनवाई ना करने का अधिकार मिलने […]
