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पिथौरागढ़ के इतिहास व वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर एक गोष्ठी

पिथौरागढ़ – उत्तराखण्ड शोध संस्थान की ओर से पिथौरागढ़ के इतिहास व वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर एक गोष्ठी की गई । इसमें प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. मदन चन्द्र भट्ट ने अपने विचार स्कूली बच्चों के साथ साझा किए। कहा कि पिथौरागढ़ का इतिहास समृद्ध रहा है, इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना […]

पिथौरागढ़ – उत्तराखण्ड शोध संस्थान की ओर से पिथौरागढ़ के इतिहास व वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर एक गोष्ठी की गई । इसमें प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. मदन चन्द्र भट्ट ने अपने विचार स्कूली बच्चों के साथ साझा किए।

कहा कि पिथौरागढ़ का इतिहास समृद्ध रहा है, इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। गुरुवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. आशा जोशी ने की। इस मौके पर डॉ. डीके मौर्य ने स्थानीय इतिहास की जानकारी दी। पूर्व राजभाषा प्रबंधक भुवन जोशी ने कहा कि कुमाऊंनी में स्थानीय इतिहास एवं संस्कृतिक धरोहर विद्यमान है। देवराज बिष्ट ने ब्रिटिश काल की घटनाओं का उल्लेख किया। पद्मा दत्त पंत ने कहा कि एटकिंशन ने पटवारियों के माध्यम से गजेटियर का प्रकाशन किया। कार्यक्रम का संचालन मोहन जोशी ने किया।

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