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पिथौरागढ़ में खोला जाए कुमाऊं का राजकीय विश्वविद्यालय

पिथौरागढ़। उच्च शिक्षा के लिए पलायन को मजबूर युवा पीढ़ी संवाद सहयोगी, पिथौरागढ प्रदेश के लिए स्वीकृत दो राजकीय विश्वविद्यालयों में से एक सीमांत जिले पिथौरागढ़ में खोले जाने की मांग उठने लगी हैं। जिले के लोगों ने इसके लिए उच्च शिक्षा के चलते हो रहे पलायन को अपना आधार बनाया है। जनमंच और छात्र […]

पिथौरागढ़। उच्च शिक्षा के लिए पलायन को मजबूर युवा पीढ़ी संवाद सहयोगी, पिथौरागढ प्रदेश के लिए स्वीकृत दो राजकीय विश्वविद्यालयों में से एक सीमांत जिले पिथौरागढ़ में खोले जाने की मांग उठने लगी हैं। जिले के लोगों ने इसके लिए उच्च शिक्षा के चलते हो रहे पलायन को अपना आधार बनाया है। जनमंच और छात्र संघ की ओर से उच्च शिक्षा मंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है भारत-नेपाल-चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसे जिले में उच्च शिक्षा के सीमित विकल्प हैं। मजबूरी में यहां के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, देहरादून, लखनऊ जैसे बड़े शहरों की पलायन कर रहे हैं। उच्च शिक्षा के वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने से सारा बोझ पिथौरागढ़ महाविद्यालय पर पड़ रहा है। जो पहले ही संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इसके चलते उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जिले में स्नातकोत्तर की शिक्षा के बाद के कोई विकल्प नहीं हैं। इन स्थितियों को देखते हुए पिथौरागढ़ में राजकीय विश्वविद्यालय आवश्यक है। कुमाऊं के अन्य जिलों में उच्च शिक्षा की स्थिति बेहतर है। इसे देखते हुए राजकीय विश्वविद्यालय पिथौरागढ़ में स्थापित किया जाए। ज्ञापन में पिथौरागढ़ महाविद्यालय की लाइब्रेरी में पर्याप्त पुस्तकों का इंतजाम करने, शिक्षकों की कमी को दूर करने की भी मांग की गई है। ज्ञापन भेजने वालों में जनमंच के संयोजक भगवान रावत, छात्रसंघ अध्यक्ष राकेश जोशी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष महेंद्र रावत, किशोर जोशी, मुकेश चंद आदि शामिल थे।

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