नई दिल्ली
पूर्वोत्तर में चीन-म्यांमार-बांग्लादेश की सीमा पर भारत ने अब ऐसा कदम उठाया है जिससे ड्रैगन की टेंशन बढ़ सकती है। भारत अब केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रहा, बल्कि रणनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए चीन को साफ संदेश भी दे रहा है। अरुणाचल प्रदेश के डोंग गांव में 29 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक ‘सनराइज फेस्टिवल’ का आयोजन किया जाएगा।
इसकी खास बात यह है कि 1 जनवरी 2026 को नए साल की पहली सुबह का स्वागत हजारों भारतीय सामूहिक सूर्य नमस्कार के साथ करेंगे। वह भी उस गांव में, जहां भारत में सबसे पहले सूरज निकलता है। यह उत्सव न सिर्फ आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह एक रणनीतिक कदम भी है, क्योंकि यह आयोजन चीन की सीमा से सटे गांव में होगा। इस आयोजन की मंजूरी दे दी गई है। किबिथू एक अग्रिम सेना चौकी है जो सीधे चीन से सटी है।
भारत पूर्वोत्तर में चीन के प्रभाव को कम करने और रणनीतिक पहुंच को मजबूत करने के लिए एक के बाद एक बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं लागू कर रहा है। ग्रीनफील्ड हाईवे शिलॉन्ग से सिलचर तक 22,864 करोड़ की लागत से 166 किमी लंबा चार-लेन ग्रीनफील्ड राजमार्ग मंजूर हुआ है। भारत ने बांग्लादेश की जमुना नदी में ड्रेजिंग कर व्यापारिक जहाजों के लिए गहराई बढ़ाने का काम तेज किया है, जिससे कोलकाता से गुवाहाटी तक जलमार्ग से कंटेनर भेजना आसान हो सके।
भारत-म्यांमार सहयोग के तहत म्यांमार में भारतीय मदद से सिटवे बंदरगाह तैयार किया गया है। इस पोर्ट तक मिजोरम से सड़क कनेक्टिविटी को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें पालेतवा-जोरिनपुई मार्ग की कड़ी अभी बाकी है। यह क्षेत्र अभी म्यांमार के विद्रोही प्रभाव में है। बांग्लादेश में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद भारत ने अपने रणनीतिक विकल्पों को और मजबूत करने की दिशा में काम तेज कर दिया है। लालमोनिरहाट में चीन के पुराने हवाई अड्डे को पुनर्जीवित करने की खबरों ने नई दिल्ली को सतर्क कर दिया है।
बता दें 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद भारत समझ चुका है कि पूर्वी मोर्चे पर चीन की हर हरकत को जवाब देना जरुरी है। यही कारण है कि भारत अब सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता घटाकर वैकल्पिक मार्गों के जरिए सुरक्षा पुख्ता करने में जुटा है। भारत की यह नई रणनीति केवल सैन्य दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे के जरिए से चीन को कड़ा संदेश देने की कोशिश है। सनराइज फेस्टिवल और ग्रीनफील्ड हाईवे जैसी योजनाएं दिखाती हैं कि भारत अब सीमाओं की केवल चौकसी ही नहीं कर रहा, बल्कि उन पर गर्व से खड़ा होकर दुनिया को अपनी संप्रभुता और संकल्प का परिचय दे रहा है।
