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मोटे और बीमार लोगों को, बीमा पॉलिसी नहीं दे रही हैं, बीमा कंपनियां

नई दिल्ली भारत की बीमा कंपनियां इन दोनों मोटे और गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को बीमा पॉलिसी नहीं बेच रही हैं। बीमा व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों की माने, तो लगभग 7 करोड़ लोगों को बीमा पॉलिसी नहीं मिली है। इनमें से अधिकांश ओवरवेट या गंभीर बीमारियों के मरीज थे।बीमा कंपनियां पॉलिसी बेचने के […]


नई दिल्ली

भारत की बीमा कंपनियां इन दोनों मोटे और गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को बीमा पॉलिसी नहीं बेच रही हैं। बीमा व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों की माने, तो लगभग 7 करोड़ लोगों को बीमा पॉलिसी नहीं मिली है। इनमें से अधिकांश ओवरवेट या गंभीर बीमारियों के मरीज थे।
बीमा कंपनियां पॉलिसी बेचने के पहले कडा परीक्षण कर रही हैं। बीमा कंपनियों ने अपने एजेंटों को कह रखा है। ओवरवेट व्यक्तियों और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को अतिरिक्त प्रीमियम लेकर भी बीमा पॉलिसी नहीं दें।
बीमा कंपनियों द्वारा यदि पॉलिसी दी भी जा रही है। तो उसमें 25 फीसदी ज्यादा प्रीमियम लिया जा रहा है। एक करोड रुपए की बीमा में केवल 46 लाख रुपए तक के भुगतान की अधिकतम सीमा तय की जा रही है। बीमा कंपनियों द्वारा मासिक प्रीमियम भी बढ़ा दिया है,वहीं क्षतिपूर्ति को घटा दिया है।
बीमा नियामक इरडा के स्पष्ट नियम नहीं होने से बीमा कंपनियां मीठा-मीठा हप्प और कड़वा कड़वा थू की तर्ज पर बीमा पॉलिसी बेच रही हैं। बीमा कंपनी को प्रीमियम का लाभ हो, लेकिन उसे मुआवजा नहीं देना पड़े। यह बीमा कंपनियों की प्राथमिकता बन गई है। मोटे और गंभीर बीमारियों के लोगों को बीमा पॉलिसी नहीं मिल रही है। बीमा कंपनियों की कमाई दिनों दिन बढ़ रही है। स्वास्थ्य से जुड़ी बीमा कंपनियां सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर रही हैं।
भारत में लगभग 7 करोड लोग ओवरवेट हैं। 2035 तक इनकी संख्या बढ़कर 14 करोड़ पर पहुंच जाएगी। बीमा कंपनियां डायबिटीज, हाइपरटेंशन, लीवर और कैंसर से संबंधित बीमारियों के लिए बीमा पॉलिसी बेचने से बच रही हैं। जिसके कारण करोड़ों बीमार लोगों को बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार और इरडा का इस और कोई ध्यान नहीं है। जिसके कारण करोड़ों मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। यह ऐसे लोग हैं, जिनके पास ना तो आयुष्मान कार्ड है। नाही उन्हें सरकारी सहायता मिलती है।

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