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Thursday, 13 August 2026
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रैंकिंग में पश्चिम बंगाल पिछड़ा

भारत के बड़े राज्यों के लिए जारी वर्ष 2025 की नई रैंकिंग में महाराष्ट्र का पहले स्थान और पश्चिम बंगाल का 13वें स्थान पर रहना बहुत अखरने वाली बात नहीं है। चिंता की बात यह है कि पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव हैं। रैंकिंग में पिछड़ना राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी की छवि खराब […]

भारत के बड़े राज्यों के लिए जारी वर्ष 2025 की नई रैंकिंग में महाराष्ट्र का पहले स्थान और पश्चिम बंगाल का 13वें स्थान पर रहना बहुत अखरने वाली बात नहीं है। चिंता की बात यह है कि पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव हैं। रैंकिंग में पिछड़ना राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी की छवि खराब कर सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केअरएज के अनुसार बड़े राज्यों में महाराष्ट्र शीर्ष पर रहा जबकि गुजरात को दूसरा, कर्नाटक को तीसरा, तेलंगाना को चौथा और तमिलनाडु को पांचवां स्थान मिला।
एजेंसी रैंकिंग का निर्धारण सात प्रमुखंिबदुओं के आधार पर करती है। इनमें आर्थिक, राजकोषीय, बुनियादी ढांचा, वित्तीय विकास, सामाजिक, शासन और पर्यावरण के पहलुओं  पर राज्यों के कामकाज को परखा जाता है। केअरएज के अनुसार राज्यों की समग्र रैंकिंग में महाराष्ट्र 56.5 अंकों के समग्र सूचकांक के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि पश्चिम बंगाल कुल 17 बड़े राज्यों में 38.9 अंक के साथ 13वें स्थान पर रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार 34.8 के समग्र सूचकांक के साथ 17वें स्थान पर रहा जो झारखंड और मध्य प्रदेश से थोड़ा पीछे है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु ने आर्थिक, वित्तीय विकास, पर्यावरण और शासन मापदंडों पर अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं छोटे, पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों से गोवा वित्तीय विकास, बुनियादी ढांचे, सामाजिक, आर्थिक एवं राजकोषीय मापदंडों में अच्छे अंक के साथ सबसे आगे रहा। बुनियादी ढांचे के  मोच्रे पर पश्चिम बंगाल बड़े राज्यों की श्रेणी में आठवें स्थान पर रहा जबकि पंजाब शीर्ष पर और उसके बाद हरियाणा और तेलंगाना रहे।
यह रैंकिंग राज्यों के स्तर पर कुछ राज्यों को आगे दिखाती है तो कई सवाल खड़े भी करती है। इसमें गोवा जैसे छोटे, पहाड़ी और पूर्वोत्तर के राज्यों तक का जिक्र है लेकिन बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और दिल्ली, उड़ीसा, छत्तीसगढ़,और आंध्र प्रदेश व केरल का कोई खास जिक्र नहीं है। क्या इन राज्यों में महत्त्व के काम नहीं हो रहे।
क्या कारण है कि इन सभी राज्यों के काम रेटिंग एजेंसियों की नजर में नहीं आ पा रहे। हाल के वर्षो में रेटिंग एजेंसियों और सव्रे एजेंसियों की बाढ़ सी आ गई है। पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों को जबरदस्त कार्य करके दिखाने की जरूरत है

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