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नगर निकायों की लापरवाही पर जिलाधिकारी ने जताई नाराजगी

चमोली  जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में मंगलवार को जनपद चमोली के सभी नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं सैनिटरी लैंडफिल साइट (एसएलएफ) और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) की स्थिति की समीक्षा की गई। यह समीक्षा जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक के अंतर्गत की गई, जिसमें नदियों में कूड़ा और अपशिष्ट जल के […]


चमोली

 जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में मंगलवार को जनपद चमोली के सभी नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं सैनिटरी लैंडफिल साइट (एसएलएफ) और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) की स्थिति की समीक्षा की गई। यह समीक्षा जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक के अंतर्गत की गई, जिसमें नदियों में कूड़ा और अपशिष्ट जल के प्रवाह को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने नगर निकायों में एसएलएफ साइट और एमआरएफ साईट की स्थित भूमि की उपलब्धता, कार्यशीलता, कूड़ा संग्रहण, पृथक्करण एवं अंतिम निस्तारण की समीक्षा भी की।
बैठक के दौरान गोपेश्वर नगर निकाय के अधिशाषी अधिकारी द्वारा एसएलएफ एवं कूड़ा प्रबंधन से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रस्तुत नहीं करने पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इसे घोर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हेतु सचिव शहरी विकास को संस्तुति भेजने के निर्देश दिए। साथ ही अधिशाषी अधिकारी कर्णप्रयाग से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु हो रहे कार्य के प्रस्ताव को तीन प्रतियों में शीघ्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए। उन्होंने समय से प्रस्ताव प्रस्तुत न करने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई अमल में लाने की बात कही।
उन्होंने गैरसैण के अधिशासी अधिकारी को 1 करोंड 90 लाख की डीपीआर दिखाने के निर्देश दिए और उपजिलाधिकारी को गैरसैण के एमआरएफ सेंटर का निरीक्षण कर कार्य प्रगति की जाँच करने के आदेश दिए।
उन्होंने कहा कि नगर निकायों द्वारा एसएलएफ एवं एमआरएफ सेंटरों के लिए ली आवंटित राजस्व भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए न किए जाने की स्थिति में संबंधित उपजिलाधिकारियों को तत्काल जांच कर भूमि वापस लेने की कार्रवाई करने के आदेश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी अधिशाषी अधिकारियों को निर्देश दिए कि नगर क्षेत्रों में ठोस एवं गीले कूड़े का वैज्ञानिक निस्तारण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदियों की स्वच्छता के लिए निकायों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सभी निकायों को निर्देशित किया कि गंगा नदी के संरक्षण, नगरों की स्वच्छता एवं पर्यावरणीय संतुलन हेतु नियमित निरीक्षण और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी, उपजिलाधिकारी आर के पांडे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे

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