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संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को हरी झंडी दी

अजय दीक्षितदिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित नए क्षितिज कार्यक्रम में बोलते हुए एक प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि उनकी तरफ से राजनीति में 75 वर्ष रिटायरमेंट की आयु जैसा उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा है न वे इस आयु रिटायर हो […]

अजय दीक्षित
दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित नए क्षितिज कार्यक्रम में बोलते हुए एक प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि उनकी तरफ से राजनीति में 75 वर्ष रिटायरमेंट की आयु जैसा उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा है न वे इस आयु रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कह दिया कि हम भारतीय जनता पार्टी के विषय में कोई आदेश देते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद चुनाव में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
मोहन भागवत के इस कथन से पिछले एक साल  से चली आ रही रिटायर होने की खबर पर विराम लग गया है और एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हरी झंडी मिल गई है।
दरअसल कुछ दिनों पहले मोहन भागवत ने स्व मोरोपंत पिंगल को उद्धत कर कह दिया था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल निकली थी कि शायद मोदी 2029 से पहले अवकाश ग्रहण करेंगे और उस श्रेणी में राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, लालमणि चौबे,सहित अनेक नेता भी शामिल थे। इसी आधार पर कलराज मिश्र, होशियारी, भुवन चंद्र खंडूरी,आदि को भी अवकाश दिया गया था। नयी दिल्ली में तो बकायदा प्रधानमंत्री पद के लिए संभावित नेताओं के नाम मीडिया में आने लगे थे जिसमें सबसे बड़ा नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ,का था। जानकार सूत्रों ने बताया है कि संघ ने इस मामले में जनता और कार्यकर्ताओं का रिएक्शन आने का इंतजार किया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प नहीं निकल पाया तो संघ ने स्थिति स्पष्ट करने में ही संगठन की भलाई समझी।दूसरे सर कारवाहा दत्तात्रेय होसबोले , ने भी अपनी भूमिका निभाई,।
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मामलों के जानकार जानते हैं कि इस प्रकार के सोच विचार नागपूर में चलते रहते हैं। योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, देवेंद्र फडणवीस, सी पी राधाकृष्णन, रेखा गुप्ता इसी विचार का परिणाम है। भारतीय जनता पार्टी जब से बनी है उसमें केवल अटल बिहारी वाजपेई ही ऐसे नेता रहे जो संघ की पकड़ से बाहर तो नहीं थे लेकिन अपने विस्तृत जनाधार के कारण संघ की मजबूरी भी थे । लालकृष्ण आडवाणी, के वो
कृष्णमूर्ति, कुशाभाऊ ठाकरे, संघ की पसंद थे।
नए क्षितिज कार्यक्रम में बोलते हुए मोहन भागवत ने और भी कई बिंदुओं को लेकर अपने विचार रखे।सबसे प्रमुख बात जो उन्होंने बताई कि 15 वीं सदी में ईरान के लोगो ने कहा कि हिमालय के उस पार वाले क्षेत्र में हदवा लोग रहते हैं। इसी से बना हिन्दू। हिंदू कोई धर्म नहीं है बल्कि भारतीय उप महाद्वीप में रहने वाला मनुष्य हिन्दू चाहे वह किसी भी धर्म को मानता हो यहां तक कि मुस्लिम भी।अभी भी मक्का मदीना में भारतीय मुस्लिमों को हिंद मुसलमान कहते हैं।
संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में इन हिन्दू लोगों के लिए ही संघ की स्थापना की थी

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