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भारत में हिंदी अब संपर्क की सबसे अधिक बोलने वाली भाषा

अजय दीक्षितमेरे एक मित्र है जो तेलंगाना में तिरुचिरापल्ली में रहते है और प्रवर्तन निदेशालय में उच्च पद पर कार्यरत हैं लेकिन वे तेलगु भाषी हैं।वे अक्सर दिल्ली में अधिकारियों से बात करते रहते हैं।20 वर्षों पहले उनकी हिंदी बहुत ही कमजोर या तो समझो कि न के बराबर थी लेकिन आजकल वे बहुत ही […]

अजय दीक्षित
मेरे एक मित्र है जो तेलंगाना में तिरुचिरापल्ली में रहते है और प्रवर्तन निदेशालय में उच्च पद पर कार्यरत हैं लेकिन वे तेलगु भाषी हैं।वे अक्सर दिल्ली में अधिकारियों से बात करते रहते हैं।20 वर्षों पहले उनकी हिंदी बहुत ही कमजोर या तो समझो कि न के बराबर थी लेकिन आजकल वे बहुत ही खूबसूरत हिंदी बोलते समझते हैं।अभी मुंबई में तीसरी भाषा महाराष्ट्र में पढ़ाने को लेकर विवाद हुआ। शिवसेना के नेता राज ठाकरे ने मराठी मानुष की बात की । लेकिन अब वह समय आ गया है कि हिंदी अपने आप जरूरत के मुताबिक अपना स्थान बना रही है।यहां तक कि अखबारों की रीडरशिप में तो अंग्रेजी को भी मात कर रही है।
 जेएनयू में हिंदी पत्रकारिता विभाग प्रवक्ता राम बिहारी पाठक का कहना है कि अब भारत की संपर्क भाषा हिंदी है ।अगर आप तेलगु ,तमिल, मलयालम,कन्नड़, मराठी में बोलेंगे तो कोई नहीं समझेगा लेकिन अगर आप टूटी फूटी हिंदी,या अंग्रेजी में संपर्क करें तो लोग समझ सकते हैं कि आप का कहना क्या है।
हिंदी को आगे बढ़ाने में टेलीविजन, राजनीति का बहुत बड़ा सहयोग है। कन्नड़ भाषी मल्लिकार्जुन खड़गे,तमिल भाषी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, शशि थरूर, गुलाम नबी आजाद, असद्दीन ओवैसी,आदि भी सदन में और मंत्रालय में हिंदी बोलते हैं।
हिंदी को राजभाषा का दर्जा है लेकिन राष्ट्रभाषा दर्जा नहीं है
हिंदी आजादी से पहले भारत की आधिकारिक भाषा नहीं थी बल्कि आजादी के बाद हिंदी को संविधान की 15 वीं अनुसूची में शामिल किया गया था।उसमें भारत की 11 प्रमुख भाषाएं दर्ज है जिसमें मलयालम,कन्नड़,तमिल,तेलगु, मराठी,बंगाली,असमी, अंग्रेजी, गुजराती, उर्दू और पंजाबी भाषा दर्ज हैं,बाद में कुछ क्षेत्रीय भाषाओं को स्थान मिला है।
समय समय पर हिंदी को संविधान की राष्ट्रभाषा बनाने के प्रयास हुए मगर तमिलनाडु से इसका विरोध शुरू हुआ।1966 में तो तमिल नेता पेरियार ने भाषाई आधार पर राज्य बनाने की मांग की उसी के चलते तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात,पंजाब, हरियाणा,आदि राज्यों का गठन हुआ। लेकिन हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा स्वीकार नहीं किया।
आजादी के बाद हिंदी सिनेमा ने हिंदी को लोकप्रिय बनाया।
महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, अटल बिहारी वाजपेई, सूर्य कांत त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद, हरिवंश राय बच्चन,आदि कवियों के सहयोग हिंदी के लिए याद किया जाएगा। लेकिन स्व जवाहर लाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेई ने प्रधानमंत्री के तौर पर हिंदी को राजकाज में उपयोग करना भी हिंदी के लिए सार्थक रहा । तमिल नाडु के राजनेता दिल्ली आ कर हिंदी सीखते हैं। सोमनाथ चटर्जी,
इंद्रजीत गुप्ता भी हिंदी बोलते समझते थे। दक्षिण भारत के नेता के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व नरसिंह राव अच्छी हिंदी बोलते थे।यहां तक कि सोनिया गांधी, सुब्रमण्यम स्वामी, रमेश चीनीथेला,ने भी हिंदी को स्वीकार किया।
अब बात करते हैं नई पीढ़ी की तो वह तो हिंदी बोलती या अंग्रेजी, कॉर्पोरेट में हिंदी का प्रचलन है।
महानगरों में केवल चेन्नई को छोड़कर,दिल्ली, मुंबई, कोलकाता,जयपुर, अहमदाबाद, बंगलुरू,पुणे, हैदराबाद, नासिक, भुवनेश्वर,पूरी, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, गोवा, ओड़िशा, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, पंजाब, असम नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर, बिहार, पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक,में हिंदी ही संपर्क भाषा है।

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