नई दिल्ली: देश में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा विभिन्न जागरूकता और नियामक पहलें संचालित की जा रही हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत एफएसएसएआई को विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करने तथा खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करने का दायित्व सौंपा गया है। इस अधिनियम का कार्यान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
वसा, नमक और चीनी की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एफएसएसएआई ने ‘आज से थोड़ा कम’ नामक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अपने दैनिक आहार में छोटे-छोटे बदलाव कर धीरे-धीरे वसा, नमक और चीनी का सेवन कम करने के लिए प्रेरित करना है।
स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए एफएसएसएआई ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर “हर लेबल कुछ कहता है” नामक जन-जागरूकता कार्यक्रम भी चला रहा है। इस पहल का मकसद उपभोक्ताओं को खाद्य लेबल की जानकारी समझने के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे पोषण मूल्य, सामग्री और संभावित एलर्जी कारकों की जानकारी के आधार पर सूचित आहार संबंधी निर्णय ले सकें।
एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं प्रदर्शन) विनियम, 2020 अधिसूचित किए हैं, जिनमें पूर्व-पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की लेबलिंग से जुड़े विस्तृत प्रावधान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन एवं संतुलित आहार) विनियम, 2020 भी अधिसूचित किए गए हैं, जिनके तहत विद्यालय परिसरों में सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संतुलित आहार को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।
देशभर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा विभागों के अधिकारी वर्ष भर नियमित निरीक्षण, निगरानी और नमूना परीक्षण करते हैं। इन कार्रवाइयों के माध्यम से खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 तथा संबंधित नियमों और विनियमों के तहत निर्धारित गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच की जाती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

