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Wednesday, 12 August 2026
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परियोजनाओं का दायरा सभी राज्यों को समेटे हुए है और पूरे भारत में यात्री और माल ढुलाई, दोनों सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अधिक जनसँख्या घनत्व वाले राज्यों पर विशेष रूप से केंद्रित

नई दिल्ली देश के अंतिम छोर तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाने और दूरदराज व वंचित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भारतीय रेल ने बड़ा कदम उठाया है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, बाईपास और फ्लाईओवर समेत कुल 100 रेलवे […]

नई दिल्ली

देश के अंतिम छोर तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाने और दूरदराज व वंचित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भारतीय रेल ने बड़ा कदम उठाया है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, बाईपास और फ्लाईओवर समेत कुल 100 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

इन परियोजनाओं पर लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जो 6,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे नेटवर्क को कवर करेगा। रेलवे विस्तार के इतिहास में इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में परियोजनाओं की संख्या में 56 प्रतिशत, रूट कवरेज में 114 प्रतिशत और निवेश में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, मंजूर परियोजनाओं का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले मार्गों को राहत देना, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार करना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। साथ ही उन क्षेत्रों तक रेल सुविधा पहुंचाई जाएगी जहां अब तक पर्याप्त कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं थी।

परियोजनाएं देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में फैली हैं। महाराष्ट्र (17 परियोजनाएं), बिहार (11), झारखंड (10) और मध्य प्रदेश (9) प्रमुख फोकस राज्य बनकर उभरे हैं। इन राज्यों में निवेश से माल ढुलाई गलियारों को मजबूती, औद्योगिक विकास को गति और यात्रियों की आवाजाही में सुधार होने की उम्मीद है।

पीएम गति शक्ति योजना के तहत जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। छत्तीसगढ़ की रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन सहित झारखंड और ओडिशा के कई रेल कॉरिडोर शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार तक पहुंच आसान बनाएंगे।

बड़े स्तर की परियोजनाओं में कसारा-मनमाड तीसरी-चौथी लाइन, खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा 5वीं-6वीं लाइन, इटारसी-नागपुर चौथी लाइन और सिकंदराबाद-वाडी तीसरी-चौथी लाइन शामिल हैं। केवल इन प्रमुख परियोजनाओं की लागत ही करीब 28 हजार करोड़ रुपये है।

यह विस्तार ‘मिशन 3000 मिलियन टन’ पहल के अनुरूप माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा कॉरिडोर मजबूत करने और पोर्ट कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, स्टील-सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी तथा देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।

भारतीय रेल का यह व्यापक विस्तार न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

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