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केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी सचिव नरेश पाल गंगवार ने किया डीयूवीएएसयू मथुरा का दौरा, पशु चिकित्सा अवसंरचना सुदृढ़ीकरण पर दिया जोर

मथुरा। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव  नरेश पाल गंगवार ने बुधवार को मथुरा स्थित उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान (डीयूवीएएसयू) का दौरा कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, नैदानिक एवं पशुधन विकास गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। दौरे के दौरान सचिव ने टीचिंग वेटरनरी क्लिनिकल […]

मथुरा।

केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव  नरेश पाल गंगवार ने बुधवार को मथुरा स्थित उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान (डीयूवीएएसयू) का दौरा कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, नैदानिक एवं पशुधन विकास गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की।

दौरे के दौरान सचिव ने टीचिंग वेटरनरी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स (टीवीसीसी), लाइवस्टॉक फार्म कॉम्प्लेक्स (एलएफसी), अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा शिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की विशेष बकरी इकाई का भी दौरा किया और उन्नत प्रजनन एवं प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में गहरी रुचि दिखाई।

इस अवसर पर श्री गंगवार ने बकरी इकाई में स्थापित बकरी वीर्य फ्रीजिंग सुविधा केंद्र का निरीक्षण किया तथा श्रेष्ठ बकरी जर्मप्लाज्म के संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और प्रसार के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें छोटे पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सचिव ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया। उन्होंने कहा कि सतत कृषि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित संवादात्मक सत्र में सचिव ने संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से चर्चा की। इस दौरान पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, पशुधन आधारित उद्यमिता और क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने संबोधन में श्री गंगवार ने देशभर में पशु चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आधुनिक नैदानिक सुविधाओं, उन्नत निदान प्रयोगशालाओं, प्रजनन प्रणालियों और प्रौद्योगिकी आधारित पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा संस्थान पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, रोग नियंत्रण, ग्रामीण समृद्धि तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से किसानों एवं पशुपालकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान हेतु व्यावहारिक और क्षेत्र-उन्मुख अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने संस्थान द्वारा अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय पशुधन विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान दे रहा है।

सचिव का यह दौरा विश्वविद्यालय और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के बीच सहयोग को नई मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ पशुधन क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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