ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हिस्सा लिया और सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ देशव्यापी अभियान की उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए आयोजित यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण और सार्थक पहल है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। अब तक नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के सात करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जो विश्व स्तर पर आनुवंशिक रोगों की जांच की सबसे बड़ी पहलों में से एक है।
उन्होंने कहा कि मिशन मोड में चलाए गए अभियान के परिणामस्वरूप करीब 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों की पहचान की गई है, जबकि 20 लाख से अधिक वाहकों (कैरियर) को भी चिह्नित किया जा चुका है। राष्ट्रपति ने कहा कि वाहकों की इतनी बड़ी संख्या भविष्य की चुनौतियों की ओर संकेत करती है, इसलिए जागरूकता, समय पर जांच और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने सिकल सेल रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 के बीच चार लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश की “सिकल मित्र” पहल का भी उल्लेख किया, जिसका शुभारंभ पिछले वर्ष विश्व सिकल सेल दिवस पर किया गया था। इस पहल के अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने और रोगियों की सहायता के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों के संयुक्त प्रयासों, जनभागीदारी और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से भारत वर्ष 2047 के लक्ष्य से पहले ही सिकल सेल रोग के उन्मूलन में सफलता प्राप्त करेगा।

