
12 जून 1929 को असेम्बली वम काण्ड का मुकदमा खत्म हुआ जिसमें भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दोनो को दिल्ली से दूर अलग-अलग भेजा गया। मिंयावली जेल में भगत सिंह को और लाहौर केन्दीय जेल में दत्त को रखा गया। उन्होने जेल में राजनीतिक बन्दीयो के साथ हो रहे गलत व्यवहार के लिये संधर्ष की योजना गाड़ी में ही बना ली थी। दोनो ने ही अलग अलग जेलो से ही नोटिस भेजकर 15 जून से भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी तथा अपनी मांगो की सूची भी सरकार के सामने रखी। 14 सितंम्बर 1929 को दोनो के लिखे हुये नोटिसो को मदन मोहन मालवीय द्वारा असेम्बली में पढे गये। अपने पत्र में भगत सिंह ने खुद को लाहौर जेल मे भेजने की मांग भी रखें ताकी अपने साथियो के साथ रह सकें।
