कालसी – भारतीय इतिहास के महान सम्राट मौर्य वंश में जन्मे अशोक द्वारा स्थापित शिला लेख आज भी पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा हुआ है । यह उत्तराखण्ड का फेमस स्थान है| ऐसा माना जाता है यह स्थान भी अशोक के साम्राज्य का हिसा रहा है। भारतीय पुरालेखो के इतिहास में कालसी के इस अशोक शिला लेख का अति महत्वपूर्ण स्थान है यह स्मारक पर्यटको के लिये महत्वपूर्ण लोकप्रिय स्थान है यहा आज भी वह पत्थर साफ सुथरा व सुरक्षित है जिसमें 253 ईं पू सम्राट अशोक के 14वे आदेश को प्राकृत भाषा ब्राहमी लिपी में पत्थर पर उत्कीर्ण किया गया है। इस पत्थर पर राजा के बताये गये आदेशो सलाहो का संकलन है इस पत्थर की ऊचाई 10 फीट चौडाई 8 फीट है। महाभारत काल में इस जगह का नाम कलसी था। उस समय यहा के शासक का नाम राजा विराट था। और उसकी राजधानी विराटनगर थी। पाण्डव अपने अज्ञातवास के समय राजा विराट के यहा पर ही रहे थे । यमुना नदी के किनारे बसा हुआ ये राज्य बहुत साधन सम्पन्न था। 7 वी यदी में इस राज्य का नाम सुधनगर भी रहा । इसके बारे में फेमस चीनी यात्री हवेनसांग ने भी लिखा है। और चीन के रास्ते में होने की बजह से हवेनसांग यहा पर विश्राम किया है। इस जगह को अच्छी तरह से देखा है इस सुन्दर क्षेत्र को महमुद गजनवी के आक्रतण के दौरान काफी नुकसान पहुचा। गुर्जर राजा भोज राज पंवार के साथ हरिद्वार के पथरी व ज्वालापुर में हुये भंयकर विरोध स्वरूप गजनवी की सेना गुस्से में कलसी से गुजरी और तहस नहस करती चली गई।
कैसे पहुचें यहा – चण्डीगंढ,अम्वाला से आने वाले पर्यटक पावंटा साहिब होते हुये हरबटपुर,विकासनगर के रास्तेे तथा सहारनपुर से भी बेहट, मिर्जापुर, हरबटपुर,विकासनगर के रास्ते तथा हरिद्वार, देहरादून के रास्ते से आने वाले पर्यटक भी हरबटपुर,विकासनगर के रास्ते से होकर इस स्थान पर पहुच सकते है।
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ऐतिहासिक पर्यटक स्थल है कालसी का अशोक शिला लेख
कालसी – भारतीय इतिहास के महान सम्राट मौर्य वंश में जन्मे अशोक द्वारा स्थापित शिला लेख आज भी पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा हुआ है । यह उत्तराखण्ड का फेमस स्थान है| ऐसा माना जाता है यह स्थान भी अशोक के साम्राज्य का हिसा रहा है। भारतीय पुरालेखो के इतिहास में कालसी के इस अशोक […]
