बागेश्वर – वन कानून 1927 में प्रस्तावित संशोधनों में विचार-विमर्श पर सवाल संगठन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के लोगों ने बढ़ चढक़र हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस संशोधन को जनता का अहित बताया। वक्ताओं ने कहा कि यदि वन अधिनियम 2019 आया तो पहाड़ तथा मैदानी क्षेत्र के लोगों का जंगल से नाता हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। लोगों को जानवर चुगाने और सूखी लकड़ी लाना भी दूभर हो जाएगा। सरकार इस नियम के तहत कॉरपोरेट जगत को इसमें कब्जा करने की खुली दावत देने की तैयारी में लग गया है। लोगों को जागरूक कर इस कानून का पुरजोर विरोध किया जाएगा। रविवार को पिंडारी मार्ग स्थित एक होटल में गोष्ठी में ऑल इंडिया पिपुल्स फ्रंट के केंद्रीय संयोजक गिरीजा पाठक ने कहा कि इस काननू से खासकर आदिवासी, वनवासी, पहाड़ और जंगलों में सदियों से रहने वाले समुदायों को परंपरागत वन अधिकार समाप्त हो जाएंगे। इसके अलावा वन विभाग को असीमित अधिकार दिए जा रहे हैं। इसमें गोली मारने तक के अधिकार दिए जा रहा है। राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि आजादी से पहले से ही जंगलों में लोगों का अधिकार रहा है। अब सरकार उस अधिकार से लोगों का वंचित करना चाह रही है।
पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि सरकार यदि पहाड़ों में उद्योग लगाना चाहती है तो यहां के लोगों को ही इसका लाभ मिलना चाहिए। बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि तराई में खत्ते में रहने वालों को बेघर करने के लिए सरकार आमादा है। इसे कतई पूरा नहीं होने दिया जाएगा। ईश्वर जोशी ने कहा कि सरकार लोगों के गोचर, पनघटन की जमीन को राज्य सरकार के खाते में डालने जा रही है। अधिकारी झूठ बोलकर सरकार का साथ ले रही है। दिनेशनपुर से आए पलाश विश्वास ने कहा कि आदिवासी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मंच के माध्यम से उनकी लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाया जाएगा। अधिवक्ता डीके जोशी ने कहा कि वनों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई में वे जनता के साथ हैं। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष रमेश पांडेय कृषक ने कहा कि सरकार यहां के वनों तथा जमीन को कॉरपोरेट के हाथों बेचना चाहती है। यहां के अनवाल जो सालों से अपना जीवन यापन बुग्यालों में रहकर बीता रहे हैं। उनके जीवन पर भी संकट ला रही है। यहां पूर्व विधायक उमेद सिंह माजिला, पुष्कर सिंह मेहता अध्यक्ष सरपंच संगठन पिथौरागढ़, देवेंद्र पांडे प्रदेश उपाध्यक्ष, चंपावत से अंबादत्त पंत, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, कैलाश चंदोला, चंदन बिष्ट, मनीष कुमार, सुमित्रा पांडेय, पूरन रावत, बृजेश जोशी, दुर्गा देवी, कमला जोशी आदि रहे।
