Quick Links:
Wednesday, 12 August 2026
  • Home  
  • भारतीय सेना के जवानो ने लगाए सात सौ फलो के पौधे – जवानो के परिवारों ने भी मदद – जानिए पूरी खबर
- उत्तराखंड - ट्रैंडिंग न्यूज़ - प्रदेश की खबरें

भारतीय सेना के जवानो ने लगाए सात सौ फलो के पौधे – जवानो के परिवारों ने भी मदद – जानिए पूरी खबर

Hariom GIRI रूड़की – देश और दुनिया भर में आज 24 जुलाई को वन महोत्सव मनाया जा रहा है इसी के चलते छावनी परिषद् में भारतीय सेना के जवानो ने आज फलो और छाया देने वाले करीब सात सौ पौधे लगाए है इन पौधो को लगाने में जवानो की पत्नियों और बच्चो ने भी काफी मदद की है भयंकर गर्मी होने के बाउजूद […]

Hariom GIRI

रूड़की – देश और दुनिया भर में आज 24 जुलाई को वन महोत्सव मनाया जा रहा है इसी के चलते छावनी परिषद् में भारतीय सेना के जवानो ने आज फलो और छाया देने वाले करीब सात सौ पौधे लगाए है इन पौधो को लगाने में जवानो की पत्नियों और बच्चो ने भी काफी मदद की है भयंकर गर्मी होने के बाउजूद भी जवानो में पोधो को लगाने को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला है इस मौके पर रूड़की क्षेत्र के वन अधिकारी आन सिंह काँधली भी मौजूद रहे आन सिंह काँधली ने ही आर्मी के जवानो को यह पौधे उपलब्ध कराये है 

रूड़की छावनी क्षेत्र में काफी समय से सैकड़ो बीघा भूमि खाली पड़ी थी जहां पर किसी भी तरह के पेड़ नहीं थे इस खाली पड़ी भूमि पर आर्मी के जवानो ने फलो के पौधे लगाने का मन बनाया जिससे इस भूमि में हरियाली हो सके और हरियाली का फायदा आर्मी के जवानो सहित क्षेत्र की जनता को भी मिल सके इसी के चलते उन्होंने रूड़की क्षेत्र के वन अधिकारी आन सिंह काँधली से बात कर खाली भूमि पर पौधे लगाने की इच्छा जताई वन अधिकारी को जवानो की बात बहुत पसंद आई और उन्होंने जवानो को पौधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेते हुए कुछ समय में ही उन्हें पौधे उपलब्ध करा दिए 

कई दिनों तक मेहनत करते हुए भारतीय सेना के जवानो ने खाली पड़ी भूमि पर पौधो को लगाने के लिए सात सौ से ज्यादा गड्ढे बना दिए आज सैकड़ो जवान अपनी पत्नी और बच्चो के साथ खाली भूमि पर पहुंचे और गड्ढो में पौधे लगाना शुरू कर दिया कई घंटे की मेहनत के बाद उनका पौधे लगाने का कार्य पूरा हुआ इस मौके पर सेना के कई अधिकारी भी मौजूद रहे सेना के जवानो के द्वारा पौधे लगाने के इस कार्यक्रम की हर जगह काफी तारीफ हो रही है

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *