टिहरी।
नियमित शिक्षकों के चॉक डाउन आंदोलन के दौरान जनपद टिहरी के समस्त विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों ने निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ विद्यालय संचालन का भार संभाला।
मौलधार इंटर कॉलेज, ब्लॉक चंबा (नयी टिहरी) में अंग्रेज़ी व्याख्याता पूनम रयाल ने विद्यालय की प्रधानाचार्य का दायित्व सँभालते हुए अनुकरणीय कार्य किया। इसी प्रकार जनपद के अन्य विद्यालयों में भी अतिथि शिक्षकों ने मासिक परीक्षाओं सहित सभी शैक्षणिक कार्यों को सुचारू रूप से संपन्न कराया।
इतिहास गवाह है कि जब भी शिक्षा व्यवस्था संकट में आई, अतिथि शिक्षकों ने विभाग और सरकार का सहयोग किया है।
फिर भी विडंबना यह है कि—
ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश का वेतन, जो पूर्व से ही मिलता आया है, इस बार जनपद में रोक दिया गया। विभाग और सरकार की ओर से अब तक अतिथि शिक्षकों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस पर टिहरी जनपद की उपाध्यक्ष उषा भट्ट ने सरकार के रवैये पर गहरा खेद जताते हुए कहा— “जहाँ संकट और विपत्ति में अतिथि शिक्षक सदैव विभाग और सरकार के साथ खड़े रहते हैं, वहीं उनके हितों और अधिकारों की उपेक्षा अत्यंत दुःखद है। सरकार को चाहिए कि अतिथि शिक्षकों के समर्पण और निष्ठा का सम्मान करते हुए शीघ्र न्यायोचित निर्णय ले।”

