नई दिल्ली:
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (एनपीसी) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एनपीसी की महानिदेशक श्रीमती नीरजा शेखर तथा उप महानिदेशक (ग्रुप) श्री उमाशंकर प्रसाद ने किया। बैठक का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता और अनुपालन सहयोग के क्षेत्रों में संभावित साझेदारियों की संभावनाओं का अन्वेषण करना था।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने उद्योग जगत की उभरती और लगातार बदलती आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए संस्थानों के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रासंगिक बने रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश के नेतृत्व ने भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की है और “विकसित भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु संस्थानों को व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों स्तरों पर योगदान देना होगा। उन्होंने एनपीसी जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी को शासन, उत्पादकता, स्थिरता और नवाचार से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर आईआईसीए के विभिन्न स्कूलों और केंद्रों के प्रमुखों द्वारा संस्थान की भूमिका और गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन प्रस्तुतियों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, वकालत (एडवोकेसी) और परामर्श सेवाओं के माध्यम से सरकार एवं निजी क्षेत्र की पहलों को समर्थन देने में आईआईसीए की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित किया गया।
संवाद के दौरान एनपीसी की महानिदेशक श्रीमती नीरजा शेखर ने बताया कि एनपीसी की स्थापना वर्ष 1958 में स्वतंत्रता के तुरंत बाद हुई थी, जब देश सीमित संसाधनों और उत्पादकता बढ़ाने की तात्कालिक आवश्यकता से जूझ रहा था। उन्होंने जापान की ऐतिहासिक उत्पादकता यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उसी से प्रेरित होकर भारत में संस्थागत उत्पादकता आंदोलन की नींव रखी गई। उन्होंने कहा कि समय के साथ एनपीसी ने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार उद्योग से आगे बढ़ाकर कृषि, सेवाओं, एमएसएमई, स्थिरता, हरित उत्पादकता और ईएसजी आधारित पहलों तक कर लिया है।
उन्होंने एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन सहयोग में एनपीसी की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिसमें पर्यावरण ऑडिट, ऊर्जा अनुपालन, जल प्रबंधन, बीआरएसआर रिपोर्टिंग और ईएसजी परामर्श शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एनपीसी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ मिलकर उभरते अनुपालन ढाँचों और उद्योग की नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप पेशेवर क्षमता निर्माण पर भी कार्य कर रहा है।
अपने संबोधन में आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ने कहा कि आज के समय में प्रशिक्षण संस्थान, शोध निकाय और नीति संगठन अलग-थलग रहकर कार्य नहीं कर सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र कार्यक्रम, सीएसआर प्रभाव ढाँचे, अनुपालन क्षमता निर्माण और अनुप्रयुक्त अनुसंधान जैसे क्षेत्रों को तत्काल सहयोग के प्रमुख बिंदुओं के रूप में चिन्हित किया।
बैठक के अंत में दोनों संस्थानों ने मिलकर आगे कार्य करने की मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस साझेदारी के माध्यम से आईआईसीए की नीति अनुसंधान, प्रशिक्षण और परामर्श क्षमताओं को एनपीसी की व्यवहारिक और कार्यान्वयन आधारित उत्पादकता विशेषज्ञता के साथ जोड़कर भारत को एक उच्च आय, प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और सतत अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करने का लक्ष्य रखा गया। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नवीन सिरोही, प्रमुख – स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, आईआईसीए द्वारा किया गया।

