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एसआरएचयू में सर्वाइकल कैंसर रोकथाम एवं नियंत्रण पर व्याख्यान 

 स्वामीराम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर एक विशेष गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करने के साथ एचपीवी वैक्सीन और नियमित जांच के महत्व की जानकारी दी गई। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्त्री रोग कैंसर विशेषज्ञ एवं […]

 स्वामीराम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर एक विशेष गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करने के साथ एचपीवी वैक्सीन और नियमित जांच के महत्व की जानकारी दी गई। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्त्री रोग कैंसर विशेषज्ञ एवं पद्मश्री से सम्मानित प्रो. नीरजा भाटला ने सर्वाइकल कैंसर जागरूकता, एचपीवी वैक्सीनेशन तथा स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल पर वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित जानकारी साझा की। उन्होंने वर्तमान में उपलब्ध एचपीवी वैक्सीन गार्डासिल 4 और गार्डासिल 9 के बारे में बताते हुए कहा कि गार्डासिल-9 कई प्रकार के एचपीवी स्ट्रेन्स से व्यापक सुरक्षा प्रदान करती है।
उन्होंने भारत की स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन सर्वावैक का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देशभर में वैक्सीनेशन की पहुंच और किफायती उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा। प्रो. नीरजा ने बताया कि 20 वर्ष से कम आयु की महिलाओं के लिए सिंगल-डोज वैक्सीनेशन पर्याप्त माना जाता है, जबकि 21 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं को दो डोज लेने की सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा कि यौन सक्रिय महिलाएं भी एचपीवी वैक्सीनेशन करा सकती हैं, हालांकि टीकाकरण से पूर्व उचित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग करवाना बेहतर रहता है। मौके पर एसआरएचयू के महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेंद्र चैहान तथा हिम्स के डीन डॉ. ए शरीफ ने प्रो. नीरजा भाटला का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिरा नौटियाल ने किया, जबकि डॉ. निक्कू यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में क्लीनिकल रिसर्च, नर्सिंग के विद्यार्थियों तथा पीजी रेजिडेंट्स ने प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने एचपीवी जागरूकता अभियान, कैंसर रोकथाम पहल और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में युवा स्वास्थ्य पेशेवरों एवं शोधकर्ताओं की भूमिका को लेकर विशेषज्ञों से संवाद भी किया।

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