जबलपुर,
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को मध्य प्रदेश के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश देते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति और समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने जनजातीय समुदायों के शैक्षिक विकास पर विशेष बल देते हुए कहा कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उनकी पहचान, संस्कृति और अस्मिता को भी संरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान और कौशल के संरक्षण एवं प्रसार के लिए विशेष प्रयास करने की अपेक्षा जताई।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और नवाचार की भावना विकसित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गर्व का भाव विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता, स्वच्छता और वंचित वर्गों के विकास जैसे विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि समाज और देश की नीतियों को मजबूत आधार मिल सके।
अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों—सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी—को जीवन का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यही मूल्य कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन करते हैं और एक आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
राष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि वे केवल अपने परिवार या विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग समाज के व्यापक कल्याण के लिए करने तथा ग्रामीण और वंचित समुदायों की समस्याओं के समाधान में योगदान देने का आग्रह किया।
देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर वैश्विक पहचान बनाने की सलाह दी, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव-विविधता की रक्षा और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता प्रत्येक युवा की जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं के ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा।

