नई दिल्ली/हिसार। हरियाणा के विश्वप्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी से हाल ही में प्राप्त मानव कंकाल अवशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने विस्तृत वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई) को सौंप दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिंधु-सरस्वती सभ्यता के इतिहास, जनसंख्या, स्वास्थ्य और आनुवंशिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण रहस्यों को उजागर करने में सहायक साबित होगा।
लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला राखीगढ़ी सिंधु-सरस्वती सभ्यता की सबसे बड़ी ज्ञात बस्ती माना जाता है। वर्ष 2025-26 के उत्खनन सत्र के दौरान एएसआई की उत्खनन शाखा-II ने टीला संख्या-7 में आठ कब्रों की खोज की, जिनमें से तीन पूर्ण मानव कंकाल तथा अन्य कंकाल अवशेष प्राप्त हुए। इन्हें अब कोलकाता स्थित भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की प्रयोगशाला में अनुसंधान हेतु भेजा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन अवशेषों पर प्राचीन डीएनए (aDNA) विश्लेषण, समस्थानिक अध्ययन, अस्थिविज्ञान, पुरारोग विज्ञान और पर्यावरणीय पुनर्निर्माण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे हड़प्पा काल के लोगों की वंशावली, प्रवास, खान-पान, रोगों और जीवनशैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होने की संभावना है।
इस शोध में भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के साथ बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) सहित कई प्रमुख संस्थान सहयोग करेंगे।
भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक प्रो. बी.वी. शर्मा ने बताया कि एएसआई और एएनएसआई के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत यह हस्तांतरण किया गया है। इससे सिंधु-सरस्वती सभ्यता पर बहुविषयक अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. कुमारस्वामी थंगराज ने कहा कि राखीगढ़ी के अवशेषों पर प्राचीन डीएनए अध्ययन से लगभग 3000 ईसा पूर्व के मानव समुदायों के आनुवंशिक इतिहास और विकास प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। वहीं बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने इसे हड़प्पा सभ्यता के जीनोमिक इतिहास के पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध केवल पुरातत्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इतिहास, मानवविज्ञान, आनुवंशिकी, स्वास्थ्य विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन जैसे क्षेत्रों को भी नई जानकारी प्रदान करेगा।
अधिकारियों के अनुसार एएसआई और एएनएसआई का यह संयुक्त प्रयास भारत के प्राचीन इतिहास को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राखीगढ़ी से प्राप्त निष्कर्ष विश्व की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक के उद्भव, स्वास्थ्य, जीवनशैली और जैविक इतिहास पर नई रोशनी डाल सकते हैं।

