प्रदेश में कक्षा आठवीं तक के 52 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढऩे लगे हैं। निजी स्कूलों की ओर बढ़ते इस रुझान के कारण स्कूल भी फीस में लगातार इजाफा कर रहे हैं। इसका बोझ अभिभावकों पर पड़ रहा है।
नैनीताल का हर अभिभावक एक बच्चे को पढ़ाने के लिए हर महीने औसतन 1229 रुपये फीस भर रहा है। जबकि प्रदेश स्तर पर एक बच्चे की शिक्षा का मासिक खर्च औसतन करीब 800 रुपये आ रहा है। स्कूल फीस के मामले में देहरादून सबसे महंगा शहर है। प्रदेश में शिक्षा की स्थिति बताती राज्य सरकार की ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट ही इस बात की तस्दीक कर रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्र में 70 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं। प्राइवेट स्कूल पसंद आने की अभिभावकों की पहली वजह शिक्षा की बेहतर गुणवत्ता है। इसके अलावा अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, नियमित कक्षाएं, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी पर अधिक ध्यान देना भी निजी विद्यालयों की ओर झुकाव बढऩे का प्रमुख कारण है। प्रदेश के सीमांत चमोली और चम्पावत जिलों में भी निजी स्कूल तेजी से बढ़ रहे हैं। ग्रामीण पर्वतीय इलाकों में भी 40 फीसदी से अधिक बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जा चुके हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार न होने के कारण प्राइवेट शिक्षा लगातार महंगी हो रही है।
बेटियों को प्राइवेट स्कूल भेजने में अभिभावक भेदभाव कर रहे हैं। प्रदेश की कुल बेटियों में से 51 फीसदी बेटियां सरकारी स्कूलों में पढ़ रही है। इसके उलट कुल लडक़ों में सिर्फ 43 फीसदी ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा ले रहे हैं।
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नैनीताल के अभिभावक पढ़ाई पर खर्च करने में सबसे आगे
प्रदेश में कक्षा आठवीं तक के 52 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढऩे लगे हैं। निजी स्कूलों की ओर बढ़ते इस रुझान के कारण स्कूल भी फीस में लगातार इजाफा कर रहे हैं। इसका बोझ अभिभावकों पर पड़ रहा है। नैनीताल का हर अभिभावक एक बच्चे को पढ़ाने के लिए हर महीने औसतन 1229 रुपये […]
