तरबूज
कैसे पैदा होता है और कहा होता है – यह रेतीले भूमि में होता है। इसकी लता होती है, जिसमें गोल या अण्डाकार कुम्हरे जैसा फल लगता है। फल का गूदा अन्दर से लाल होता है, और उसके बीज काले होते है। इसके गूदे में जल की मात्रा अत्यधिक होती है।
तरबूज की उपयोगिता
आयुर्वेदिक मत से कच्चा तरबूज मलरोधक,शीतल,भारी और दृष्टि, पित्त और वीर्य को नष्ट करने वाला होता है। यह पीलिया में फायदा पहुचाता है। पका हुआ तरबूज पित्तकारक, क्षारयुक्त,गरम और वात कफ नाशक होता है। तरबूज की मगज मधुर बलकारक, रूचिवर्धक और धतु-वर्धक होती है। इसके पत्ते कड़वे और रक्तवर्धक होते है। ये खून की उल्टी को बन्द करते है।
इसका पका हुआ फल शीतल, कफ निस्सारक, मूत्रल, अग्निवर्धक और रक्तशोधक होता है। यह प्यास को बुझाता है। और दिल को दूरूस्त करता है। आंखो की तकलीफ,खाज और खुजली मे यह लाभदायक है तथा इसके बीज मस्तक के लिये पौष्टिक है।
- इसके बीच मूत्रल और पौष्टिक होते है। ये कृमिनाशक भी है। और टाइफाइड में भी लाभदायक पाये गये है।
- इसके फल में विरेचक शक्ति होती है। इसको गुदा,जलोदार एंव पेट की अन्य शिकायतो में प्रयुक्त किया जाता है।
