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Wednesday, 12 August 2026
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सूंघने वाले नशे की गिरफ्त में छोटे छोटे मासूम – शहर में खुलेआम बिक रहे है नशीले प्रदार्थ – पुलिस प्रशासन मौन

हरिओम गिरी/रूड़की रूड़की- शिक्षा नगरी के नाम से मशहूर रूड़की शहर में छोटे छोटे बच्चे टायर में पंचर लगाने में इस्तेमाल किये जाने वाले सुलोशन के नशे की चपेट में आ रहे है सुलोशन को नशे के रूप में इस्तेमाल करने वाले इन बच्चो की उम्र मात्र 8 साल से 15 साल के बीच है […]

हरिओम गिरी/रूड़की

रूड़की- शिक्षा नगरी के नाम से मशहूर रूड़की शहर में छोटे छोटे बच्चे टायर में पंचर लगाने में इस्तेमाल किये जाने वाले सुलोशन के नशे की चपेट में आ रहे है सुलोशन को नशे के रूप में इस्तेमाल करने वाले इन बच्चो की उम्र मात्र 8 साल से 15 साल के बीच है सुलोशन का नशा करते यह बच्चे शहर में खुलेआम सूंघकर नशा करते हुए दिखाई देते है हैरानी की बात यह है की शहर ऐसे समाजसेवी तो बहुत है जिनके बैनर शहर में लगे होते है और समाजसेवी लिखा होता है लेकिन हकीकत यह है की शहर में ऐसा कोई समाज सेवी नहीं है जो वाकई समाज की सेवा करता हो जो इन छोटे छोटे बच्चो के द्वारा किये जा रहे नशे पर रोक लगाने का प्रयास कर सके

शहर में अभी इस तरह का नशा करने वाले बच्चो की संख्या पचास के पार हो सकती है जो लगातार बढ़ रही है ऐसा भी नहीं है की यह बच्चे अचानक से ही शहर में आ गए है कई साल से सुलोशन और व्हाइटनर को सूंघ कर नशा करने वाले बच्चे शहर में देखे जा रहे है सुलोशन टायर में पंचर लगाने का सामान बेचने वाली दुकानों पर मिलता है और व्हाइटनर किताबो की दूकान पर लेकिन छोटे बच्चो के द्वारा नशे में इस्तेमाल किये जाने के चलते कुछ किताब बेचने वाले दुकानदार भी पैसा कमाने के लालच में सुलोशन बच्चो को बेच रहे है

आश्चर्य की बात है कि नशे की इस लत से 8 से 15 वर्ष तक के बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं बच्चे सुलोशन का थोड़ा भाग दूध दही में इस्तेमाल होने वाली सफ़ेद रंग की पॉलिथीन में डाल देते हैं तथा पॉलिथीन में हवा भरकर उसका मुंह बंद कर देते हैं थोड़ी देर बाद उस पॉलिथीन की हवा को मुंह से अंदर सांस के रूप में इस्तेमाल करते हैं जिससे बच्चों को नशे का अनुभव होता है और बच्चे धीरे-धीरे मदहोश हो जाते हैं इन बच्चों काे घरों में माता पिता से भी सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाने के कारण बच्चे भटकाव की दिशा में बढ़ रहे हैं  

सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है की इन बच्चो को सूंघकर नशा करते हुए आम तौर पर शहर में देखा जाता है लेकिन कभी पुलिस या प्रशासन की और से भी किसी तरह की कार्यवाही या रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है जबकि आबकारी निरीक्षक रूड़की मानवेन्द्र पंवार का कहना है की हाईकोर्ट के निर्देश पर इस तरह के सभी नशीले प्रदार्थो पर उत्तराखंड में प्रतिबन्ध लगा दिया गया है अगर कोई ऐसे प्रदार्थो को बेचता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी

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