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आचार्यकुलम् में स्वयं को महामानव के रूप में गढ़ने की दीक्षा सुलभ है : स्वामी रामदेवहरिद्वार

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि आचार्यकुलम् में स्वयं को महामानव के रूप में गढ़ने की दीक्षा सुलभ रूप से प्रदान की जाती है। दुनिया के इस विशिष्ट शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और नव-संरचना का सहज स्वभाव निहित रहता है। उन्होंने इससे पहले आचार्यकुलम् में सत्र 2024-2025 की वार्षिक प्रदर्शनी का उदघाटन किया। […]

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि आचार्यकुलम् में स्वयं को महामानव के रूप में गढ़ने की दीक्षा सुलभ रूप से प्रदान की जाती है। दुनिया के इस विशिष्ट शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और नव-संरचना का सहज स्वभाव निहित रहता है। उन्होंने इससे पहले आचार्यकुलम् में सत्र 2024-2025 की वार्षिक प्रदर्शनी का उदघाटन किया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आचार्यकुलम् के विद्यार्थी पूर्वजों के ज्ञान का आधुनिक विज्ञान से सम्मिश्रण कर सफलता के नये प्रतिमान गढ़ रहे हैं। पतंजलि विवि की कुलानुशासिका साध्वी देवप्रिया, आचार्यकुलम् की उपाध्यक्षा डॉ. ऋतम्भरा शास्त्री, प्राचार्या स्वाति मुंशी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

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