बिना रकीब के इश्क का मजा ही क्या ?
बिना रकीब के इश्क का मजा ही क्या? शहादत के इस इश्क में राजगुरू अपना रकीब समझते थे भगतसिंह को। भगत सिंह के लिये यह एक अच्छी खासी दिल्लगी थी परन्तु राजगुरु के लिए यह एक पूरी तरह से दिल लगा थी । भगतसिंह शारीरिक सुन्दरता में साधारण से बहुत अधिक अच्छे थे तो राजगुरू […]
